शिवमूर्ति की स्वीकृति का बैंड-बाजा
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हिन्दी साहित्य के प्रमुख कथाकार शिवमूर्ति पर एक रोचक विस्तृत लेख ।
सुनील गंगोपाध्याय : भारतीय साहित्य के एक सितारे
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प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार सुनील गंगोपाध्याय का कोलकाता ( 23 अक्तूबर ) में निधन हो गया. वे 78 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे ।
गंगोपाध्याय बांग्ला भाषा के प्रतिष्ठित कवि और उपन्यासकार थे.उन्होंने करीब दो सौ पुस्तकें लिखी हैं जिनमें बड़ी संख्या में कहानियाँ, उपन्यास, नाटक, आलोचना, यात्रा वृत्तांत के अलावा बाल साहित्य में शामिल हैं
कन्हैयालाल नंदन मतलब धारा के विरुद्ध उल्टी तैराकी
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हिन्दी के प्रसिद्ध कवि और रचनाकार कन्हैयालाल नंदन जी को याद करते हुये चर्चित लेखक और वरिष्ठ पत्रकार दयानंद पांडेय जी का एक संस्मरण लेख ।
किसी नागवार गुज़रती चीज़ पर/ मेरा तड़प कर चौंक जाना/ उबल कर फट पड़ना/ या दर्द से छ्टपटाना/ कमजोरी नहीं है/ मैं ज़िंदा हूं/ इस का घोषणापत्र है.
क्या 'उसने कहा था' हिंदी की सर्वश्रेष्ठ प्रेम कहानी है?
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1995 में प्रकाशित 'उसने कहा था' हिंदी की एक ऐसी कहानी है जिसके पाठ में आज भी आकर्षण बना हुआ है. चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' की इस कहानी का एक नए तरीके से अध्यन्न किया हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के युवा शोधार्थी अमितेश कुमार ने ।
Nissim Ezekiel : Founding Father of Indian English Poetry
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He was a foundational figure in postcolonial India's literary history, specifically for Indian writing in English . He is rightly considered to be the Father of post independence Indian verse in English. He was a prolific poet, playwright, critic, broadcaster and social commentator.
प्रसिद्ध साहित्यकार कुंवर नारायण और उनके विचार
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कुंवर नारायण हिन्दी साहित्य में एक एसे नाम हैं जिनका समकालीन साहित्य में एक विशिष्ट स्थान हैं । आज भी 80 की उम्र होने के बाद भी साहित्य-साधना उनके लिए आज भी पहली प्राथमिकता है । कुँवर नारायण को अपनी रचनाशीलता में इतिहास और मिथक के जरिये वर्तमान को देखने के लिए जाना जाता है।
एक संघर्षशील कवि सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
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नई कविता के समर्थ और सफल कवियों में सुदामा पाण्डेय "धूमिल" का नाम महत्वपूर्ण है। सुदामा पाण्डेय धूमिल हिंदी की समकालीन कविता के दौर के मील के पत्थर सरीखे कवियों में एक है. उनकी कविताओं में आजादी के सपनों के मोहभंग की पीड़ा और आक्रोश की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है.
Basavaraj Naikar’s Fiction : Past Presented with Magic Realism
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“The struggle of man against power is the struggle of memory against forgetting” –wrote Milan Kundera . Under imperialism or totalitarianism , even fairy tales good and bad often trump truth. But in the stories and novels of Basavaraj Naikar the struggle of man against power is made unforgettable.